टाइफाइड कैसे होता है? जानिए इस बीमारी के इलाज के बारे में

टाइफाइड क्या है

यह टाइफाइड बुखार बैक्टीरिया के कारण होने वाली बीमारी है इसको आंतों का बुखार भी कहते हैं। यह एक साल्मोनेला एन्टेरिका सेरोटाइप टाइफी बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया खाने और पीने की चीजों के माध्यम से हमारे या किसी के शरीर में आसानी प्रवेश करता है और जिस कारण से हमें बीमार बना देता है।कुछ देशों में यह बीमारी का महामारी बनकर टूटा है। टाइफॉइड होने पर तेज बुखार तथा डायरिया और उल्टी जैसे लक्षण दिखने लगता हैं।

टाइफॉइड के मामले भारत के साथ साथ अन्य देश दक्षिण पूर्व एशियाई देशों जैसे अफ्रीका, मध्य व दक्षिण अमेरिका में एवं पश्चिमी प्रशांत के देशों में भी अधिकतर देखे जाते हैं। आमतौर पर टाइफाइड को गंभीर बुखार के रूप में माना और देखा जाता है और भारत में इस बीमारी की नाम से जाना जाता है उसे मोतीझारा भी कहते है और कुछ ग्रामीण हिस्सों में टाइफाइड बुखार को माता के रूप में भी माना जाता है।



टाइफाइड बुखार को हड्डियों का बुखार भी कहा जाता है। भारत में टाइफाइड के मामले सबसे ज्यादा हैं। जबकि पिछले कुछ वर्षों में मामलों की संख्या में कमी नजर आई थी टाइफाइड बुखार आमतौर पर बरसात के मौसम में अधिक फैलता है।यह बीमारी प्रदूषित पानी तथा प्रमुख कारणों में से एक है जो इस जल जनित यानि की जीबित बीमारी में योगदान देता है।

यह टाइफाइड बीमारी बच्चों को अधिक खतरा होता है। जबकि, वयस्कों की तुलना में उनके लक्षण कम और गंभीर होते हैं।अब एक और सबसे बड़ा जोखिम कारक मध्य पूर्व, यूरोप, दक्षिण और मध्य अमेरिका जैसे क्षेत्रों की यात्रा कर रहा है। दुर्लभ मामलों में ये गंभीर टाइफाइड संक्रमण से मानव की मृत्यु भी हो सकती है। टाइफाइड बुखार एक जीवाणु संक्रमण रोग है यह सिर्फ एक अंग को ही नहीं, बल्कि शरीर के कई अंगों को बहुत प्रभावित करता है |

यह बैक्टीरिया रक्तप्रवाह में पहुंचने के बाद शरीर में बैक्टीरिया यकृत, प्लीहा और मांसपेशियों संबंधी मार्ग पर हमला करते हैं। कभी-कभी यह बैक्टीरिया यकृत और प्लीहा जैसे बीमारी हो जाते हैं। ये रक्त के माध्यम से बैक्टीरिया पित्ताशय की थैली तथा फेफड़े और गुर्दे तक भी पहुंच सकते हैं।यह बीमारी सबसे प्रसिद्ध लक्षण बुखार और शरीर पर चकत्ते फैलाने वाले बीमारी हैं। इस बीमारी का प्रारंभिक चरण के दौरान मरीजों को शरीर के उच्च तापमान का भी अनुभव होता है अर्थात गर्दन और पेट पर हल्के लाल धब्बे भी आंत्र ज्वर के विकास होने को यह दर्शाते हैं।

टाइफाइड होने का कारण

टाइफाइड बुखार जो कीआंतों का एक गंभीर संक्रमण रोग है। यह रोग विभिन्तन रीकों से हो सकता है टाइफॉइड बुखार तब होता है जब कोई भी व्यक्ति कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों और पानी का सेवन करता है जिसमें एस टाइफी बैक्टीरिया की मात्रा बहुत अधिक पाई जाती है और इसके अलावा एक टाइफाइड रोगी के मल से उसके चारों ओर तरफ होने वाली पानी की आपूर्ति भी दूषित हो सकती है तथा इसके बदले में मरीज के चारों-तरफ होने वाला फूड सप्लाई चेन को भी दूषित कर सकता है।



टाइफाइड बीमारी का लक्षण

टायफायड बीमारी के रोगियों को बैक्टीरिया केआने के संपर्क में तथा आने के लगभग 1-3 सप्ताह बाद लक्षण दिखाई देते हैंये बीमारी गंभीरता के आधार पर रोग की अवधि 3 से 4 सप्ताह तक भी हो सकती है या इससे ज्यादा दिनों तक।इस सामान्य इंक्यूबेशन समय 7 से 14 दिन तक है।

टाइफॉइड के कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं –

मानव के शरीर में बुखार जो शुरूआत में कम होता है और नहीं इलाज होने पर प्रतिदिन बढ़ता रहता है संभवतः 104.9 एफ और डिग्री में (40.5 सी) तक पहुंच जाता है। जिसमे सिरदर्द,कमजोरी और थकान,भूख न लग्न और वज़न घटना,पेट में दर्द,दस्त या कब्ज,तथा डायरिया,तेज बुखार (103° फेरेनहाइट),भूख ना लगना,लिवर और स्प्लीन का बढ़ जाना,सीने पर लाल रंग के निशान,थकान,ठंड लगना,दर्द और कमजोरी महसूस होना,

टाइफाइड बीमारी की इलाज

सुरक्षित पेयजल एक बेहतर स्वच्छता और पर्याप्त चिकित्सा देखभाल टाइफाइड बुखार को रोकने और नियंत्रित करने में काफी मदद कर सकती है। दुर्भाग्य बस से कई विकासशील देशों में इसे हासिल करना बड़ा ही मुश्किल हो सकता है। इसी कारण से कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि टाइफाइड बुखार को नियंत्रित करने के लिए टीके सबसे बहुत अच्छा तरीका है। तुरंत आप अपने डॉक्टर से सलाह लें।

यदि रिपोर्ट में सकारात्मक है, तो आपका डॉक्टर कुछ दवाएं लिखेंगेऔर ज्यादातर मामलों में डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक्स के एक कोर्स के साथ इस बीमारी का इलाज करते हैं | कुछ एंटीबायोटिक्स दवा जैसे सिप्रोफ्लैक्सिन ciproflaxin और सेफ्ट्रिएक्जोन ceftriaxone और आमतौर पर टाइफॉइड के इलाज में यह मेडिसिन दिया जाता है जो एजिथ्रोमाइसिन Azithromycin भी इसके इलाज का एक दूसरा विकल्प है। जबकि , ये एंटीबायोटिक दवा प्रेग्नेंट महिलाओं को खाने के लिए सलाह नहीं दी जाती हैं।इस टाइफॉइड के ज्यादा गंभीर मामलों में कई बार आंतों में छेद हो जाता है जिसे केवल सर्जरी के जरिए ही ठीक किया जा सकता है।



टाइफाइड के बुखार में क्या खाना चाहिए

मतौर पर टाइफाइड बुखार के दौरान हल्का,फलका और आराम देने वाला भोजन किया जाता है। टाइफाइड बुखार होने के दौरान आहार पर विशेष प्रकार ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह उपचार का एक विशेस महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए भोजन को पचाने में आसान तैयार करते और चुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए। जबकि नरम, आहार शरीर की दैनिक कैलोरी जरूरतों को पूरा करने के लिए पौष्टिक रूप से पर्याप्त होना चाहिए |

पोषक तत्व पर विशेषज्ञ छोटे मगर कम अंतराल पर भोजन करने की सलाह देते हैं। टाइफाइड रोग होने पर आसानी से पचने वाले भोज्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए। टाइफॉइड बीमारी से निपटने के लिए आपको डायट में कार्ब्स, फैट और प्रोटीन के संतुलन को बनाए रखने की इसकी आवश्यकता होती है। लक्षणों को कम करने और उपचार प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए आप इन फल और फूड्स का सेवन करें

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